
उड़ी पतंग , फिर कटी पतंग
उड़ी पतंग , फिर कटी पतंग ।
मंजा देता उसका संग ।।
उडाने का चाहिए सही ढंग ।
तेज खींच और , मस्त मलंग।।
पतंगो का त्योहार निराला।
कितना सुंदर, और मतवाला।।
पतंग काट कर यह दिखाते।
वो काटे का शोर मचा ते ।।
गजक , रेवड़ी खाते बच्चे ।
खूब पतंग उड़ाते बच्चे।।
मंजा-चरखी का है यार।
मकर संक्रांति यह त्यौहार।।
आराध्य नारायण
उम्र -१५ वर्ष
२/३८, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, गुप्तेश्वर रोड, दौसा
८९२३७९४२१३